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रामावतार जग्गी हत्याकांड : छत्तीसगढ़ के पूर्व CM के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा

हाईकोर्ट ने CBI की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह पलट दिया

बिलासपुर, 6 अप्रेल। बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (Ramavtar Jaggi murder case) में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम और निर्णायक फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह पलट दिया।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भी निर्धारित की गई है।

यह फैसला 31 मई 2007 को आए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह उलट देता है। उस समय रायपुर की विशेष अदालत (एट्रोसिटी) ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि एक ही गवाह और साक्ष्य के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर देना न्यायिक दृष्टि से असंगत और त्रुटिपूर्ण है। अदालत ने इसे गंभीर कानूनी चूक मानते हुए निचली अदालत के निर्णय को निरस्त कर दिया।

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा शुरू हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने केस को पुनः विचार के लिए हाईकोर्ट को भेजा था, जिसके बाद विस्तृत सुनवाई के उपरांत यह फैसला आया।

क्या था पूरा मामला?

4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के सक्रिय नेता और प्रदेश कोषाध्यक्ष थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। इस हत्या ने उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।

इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से दो-बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह- सरकारी गवाह बन गए थे। ट्रायल कोर्ट ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

source : Patrika

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