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नहीं दिखा चांद, 21 को ईद- उल- फितर, जानें क्यों मनाई जाती है ईद

यह त्योहार पवित्र महीने रमज़ान के खत्म होने के बाद मनाया जाता है

कोरबा, 19 मार्च। इस्लाम धर्म का सबसे बड़ा पर्व ईद- उल- फितर यानी ईद (Eid) 21 मार्च को मनाई जाएगी। 19 मार्च को पूरे छत्तीसगढ़ में चांद की तस्दीक नहीं हो सकी है। यह त्योहार पवित्र महीने रमज़ान के खत्म होने के बाद मनाया जाता है।

ईद, जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है, इस्लाम का एक प्रमुख और खुशियों से भरा त्योहार है। इसे पूरी दुनिया के मुसलमान बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। रमज़ान के पूरे महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं, नमाज़ अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और नेक कामों के जरिए अल्लाह की इबादत करते हैं।

क्यों मनाई जाती है ईद

ईदुल फितर का अर्थ है ’उपवास तोड़ने का त्योहार’। इसके मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैंः

इनाम का दिन : माना जाता है कि अल्लाह ने पूरे रमजान में रोजे रखने और इबादत करने वालों के लिए इस दिन को ’इनाम’ के रूप में मुकर्रर किया है।

कृतज्ञता (शुक्राना) : यह दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का है कि उसने रोजे रखने और आत्म-अनुशासन बनाए रखने की शक्ति प्रदान की।

ऐतिहासिक संदर्भ : मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब (स.अ.व.) ने ’बद्र के युद्ध’ में जीत के बाद पहली बार साल 624 ईस्वी में यह त्योहार मनाया था।

कैसे मनाई जाती है ईद?

ईद की नमाज : सुबह के समय पुरुष मस्जिदों या ईदगाहों में जाकर ईद की विशेष नमाज अदा करते हैं और अमन-चैन की दुआ मांगते हैं।

जकात-अल-फितर (फितरा) : नमाज से पहले हर सक्षम मुसलमान के लिए गरीबों को दान (फितरा) देना अनिवार्य है, ताकि वे भी खुशियों में शामिल हो सकें।

मीठी ईद : इस दिन घरों में सेवइयां और तरह- तरह के पकवान बनाए जाते हैं। लोग एक-दूसरे के गले मिलते हैं और ’ईद मुबारक’ कहते हैं।

ईदी : बड़े बुजुर्ग बच्चों को प्यार और आशीर्वाद के रूप में पैसे या उपहार देते हैं, जिसे ’ईदी’ कहा जाता है।

भाईचारा : लोग नए कपड़े पहनते हैं और अपने रिश्तेदारों व दोस्तों के घर जाकर आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।

ईद- उल- फितर का दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने तथा जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश देता है।

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