StateFeatured

कोरबा की गपशप में इस सप्ताह पढ़ें : भाजपा के मंडल अध्यक्ष क्यों हैं परेशान?, क्या राज्यपाल के निर्देशों का पालन होगा?

Korba ki gupshup (IP News) 

इस दफे भी भाजपा (BJP) की बात। वो इसलिए की पार्टी पॉवर में है तो करंट दौड़ेगा। कोरबा जिले में भारतीय जनता पार्टी के नए मंडल अध्यक्षों के मनोयन को तीन माह से अधिक समय गुजर गया है, लेकिन अभी तक इनकी कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका है। मंडल अध्यक्षों को पुरानी कार्यकारिणी को ही झेलना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि मंडल अध्यक्ष अपने हिसाब से अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं, किंतु उनके हाथ बंधे हुए हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी के राज्य स्तर का हाईकमान ही मंडल की कार्यकारिणी तय करेगा। यदि कोई मंडल अध्यक्ष X को उपाध्यक्ष बनाना चाहता है, लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकता। क्योंकि हाईकमान Y को बना देगा। यही हाल जिलाध्यक्ष का भी है। निगम के सभापति चुनाव और एमआईसी लिस्ट तैयार करने में भी ऊपर वालों का हाथ रहा। अब क्या करें सब सेंट्रलाइज्ड है भई। जय हो लोकतंत्र की …

पिछले दिनों महामहिम राज्यपाल महोदय का कोरबा आगमन हुआ। हालांकि अधिकारिक तौर पर महामहिम शब्द विलोपित कर दिया गया है, लेकिन यहां इसलिए लिखा गया कि जनसंपर्क विभाग इस शब्द का निरंतर इस्तेमाल कर रहा था, सो हमने भी लिख दिया। बात करते हैं राज्यपाल के दौरे की। उन्होंने प्रशासन की बैठक के दौरान दो बड़े मुद्दों पर जोर दिया। पहला दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाएं और दूसरा- पर्यावरण को संरक्षित रखने की दिशा में कदम उठाएं। दोनों विषय कोरबा के लिहाज से बड़े ही महत्वपूर्ण हैं। अब सवाल यह उठता है कि राज्यपाल के निर्देश के बाद भी क्या सड़क दुर्घटनाओं तथा प्रदूषण को नियंत्रित करने जिला एवं पुलिस प्रशासन कोई ठोस योजना बनाकर काम करेगा। प्रदूषण नियंत्रित होगा तो पर्यावरण भी संरक्षित होगा। जवाब यह हो सकता है कि कैसे। दरअसल कोरबा में ट्रांर्सपोर्ट और इंड्रस्टीयल लॉबी थोड़ी हावी है। फिर महीने की लेवी का भी तो सवाल है। देखते हैं राजभवन फॉलोअप लेता है या नहीं?

बुझो तो जानें :

  • शहर की प्रथम नागरिक का राइट हैंड बनने की दौड़ में कौन- कौन से पार्षद हैं?
  • जिले का वो कौन सा विभाग है, जो उस नियम का जमकर लाभ उठा रहा, जिसके माध्यम से जरूरतमंदों के लिए खरीदारी की जा सकती है?

Related Articles

Back to top button