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कोरबा की गपशप में इस सप्ताह पढ़ें : कोयले के कारोबार में किसके हाथ काले?, क्या अफसर जिला पंचायत की नई बॉडी का एंटरटेनमेंट करेंगे?

Korba ki gupshup (IP News) :

वे कहते हैं न काजल की कोठरी से कोई भी बेदाग नहीं निकल सकता। कुछ ऐसा ही हाल कोरबा में कोयले के कारोबार का है। कोयले का धंधा कुछ इस तरह है कि इसमें एंट्री करने वाले बंदे को तमाम उठा पटक करनी पड़ती है। एसईसीएल के नुमाइंदो को कुछ दो, पुलिस, खनिज, आरटीओ, प्रशासनिक अफसर और नेता, इन सभी कुछ न कुछ खैरात बांटी पड़ती है तब कहीं जाकर कारोबार फलता फूलता है। कोयले के धंधे में कांग्रेस, भाजपा के दोनों प्रमुख दलों के लोग अपने हाथ काले कर रहे हैं। जिसकी सत्ता होती है उसका धंधा थोड़ा वजनदार हो जाता है। वैसे कोरबा में सत्ताधारी दल के कई नामीगिरामी लोग इस धंधे से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। पाली की घटना तो एक छोटा सा उदाहरण थी। कुछेक को तो कोयले को इधर से उधर करने में महारत हासिल है। खैर आज के लिए इतना ही… आगामी कड़ी में पोल खोली जाएगी।

जिला पंचायत में निर्वाचित बॉडी आ चुकी है। पहली सामान्य सभा भी हो गई है। देखने में आता है कि जिला पंचायत की बैठकें परंपरागत तरीके से ही होती है। परंपरागत बोले तो विभागीय अधिकारी अपने- अपने विभाग के कामकाज को दर्शाने वाला एक फोल्डर तैयार कर लेते हैं। इस फोल्डर को निर्वाचित सदस्यों को थमा दिया जाता है। सदस्य भी फोल्डर में उल्लेखित बातों पर ही चर्चा में मशगूल हो जाते हैं। विभागीय अफसर थोड़े चालाक होते हैं। वे फोल्डर में अपने अनुसार ही कंटेट डालते हैं, लेकिन कई बार कुछेक सदस्य होमवर्क करके बैठकों में बैठ जाते हैं और क्रॉस पर क्रॉस करते हैं। लिहाजा अफसर थोड़े सहम जाते हैं। फिर शुरू होता है मैनेज करने का खेल। सदस्यों के वाहनों के टैंक डीजल- पेट्रोल से लबालब होने लगते है। तो किसी के घर पर सोफा सेट पहुंचता है तो किसी के यहां कुछ और। ऐसा होता आया, इसलिए कलम फ्लैशबैक पर चली गई। बहरहाल नई बॉडी के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य कैसे एंटरटेनमेंट होंगे यह आगे पता चलेगा।

बुझो तो जानें :

  • निगम कोरबा के सभापति एपिसोड मामले में पार्टी की जांच समिति की रिपोर्ट का परिणाम आएगा या नहीं?
  • कोरबा सांसद की कांग्रेस के किस बड़े नेता के परिवार के साथ आंतरिक खटफट है?

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