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सरोज पाण्डेय : “बचपन की टिकट” से कोरबा लोकसभा की टिकट लेने का सफर?

2024 के चुनाव में पराजित होने के बावजूद उनका संपर्क कोरबा से बना हुआ है

कोरबा, 12 अप्रेल। बचपन की टिकट … सरोज पाण्डेय (Saroj Pandey) का यह कार्यक्रम राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गया है। चर्चा इसलिए कि क्या इसके माध्यम से लोकसभा की टिकट की जुगत है?

12 अप्रेल, 2026 की शाम को कोरबा शहर के अशोक वाटिका में महिलाओं के लिए पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। आयोजक सखी सहेली महिला समूह जरूर है, लेकिन इसके पीछे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पाण्डेय की सोच और तैयारी है।

सरोज पाण्डेय की कोरबा जिले में सक्रियता इस तरफ साफ इशारा करती है कि उनकी रडार पर 2029 का लोकसभा चुनाव है। हलांकि अभी इस आम चुनाव में तीन साल का वक्त है। बावजूद इसके उनकी मंशा को समझा जा सकता है।

10 अप्रेल को कोरबा जिले के ग्राम खरवानी में सरोज पाण्डेय

भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में कोरबा सीट से सरोज पाण्डेय को टिकट दी थी, लेकिन उन्हें 43 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा था। टिकट मिलते ही कोरबा आगमन पर पहली प्रेस कान्फ्रेंस में सरोज पाण्डेय ने एक सवाल के जवाब में कहा था कौन ज्योत्सना महंत, तभी उनका अति-आत्मविश्वास झलक गया था। अंततः उसी कांग्रेस उम्मीदवार ज्योत्सना महंत से उन्हें हार मिली, जिन्हें कमतर आंका गया। खैर, हार के और भी कई फैक्टर थे।

यह माना जा रहा है कि सरोज पाण्डेय एक दफे फिर से कोरबा लोकसभा सीट से 2029 के चुनाव की दावेदार हैं। उनके करीबी भी इस ओर इशारा करते हैं। 2024 के चुनाव में पराजित होने के बावजूद उनका संपर्क कोरबा से बना हुआ है और इस वक्त वे कुछ अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं।

हालांकि अभी चुनाव को तीन साल का समय है। राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता है। क्रिकेट की खेल की तरह इसमें भी अनिश्चितता बनी रहती है, खासकर भाजपा में। क्योंकि भाजपा एक ऐसा राजनीतिक दल है जो उपयोग के बजाए प्रयोग करने में विश्वास करता है।

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